कौन थीं महा गौरी माता? हिंदू पौराणिक कथाओं का कहना है कि देवी शैलपुत्री, सोलह वर्ष की आयु में, अत्यंत सुंदर थीं और एक गोरे रंग के साथ धन्य थीं। इसलिए, उन्हें उनकी गोरी त्वचा के कारण देवी महागौरी के रूप में जाना जाने लगा।

अष्टमी तिथि किस राशि के लिए शुभ -  सभी राशियों के लिए शुभ। विशेषकर कर्क और मीन के लिए अति उत्तम।

अष्टमी तिथि को किस रंग के कपड़े पहनें -  भक्त पूजा के समय सफेद, पीले या गुलाबी रंग के वस्त्र धारण करें।

मां महागौरी कौन सी मनोकामनाएं होती हैं पूरी - महागौरी का पूजन करने से स्त्री जातकों को सौभाग्य की प्राप्ति होती है। जातक व्याधि से मुक्त रहते हैं।  

महाष्टमी का महत्व-  मां महागौरी के पूजन से सभी नौ देवियां प्रसन्न होती हैं। भगवान  शिव ने अपने जटा से बह रही गंगाजल से भगवती गौरी का अभिषेक किया। भगवती ने  पूर्ण गौरवर्ण धारण किया। यह सौभाग्य की सूचक हैं।  

मां महागौरी पूजा विधि मां महागौरी की पूजा के लिए चौकी यानी बाजोट पर देवी महागौरी की प्रतिमा या  तस्वीर स्थापित करें। फिर गंगा जल से शुद्धिकरण करें।

माता महागौरी मंत्र (Mahagauri Mantra) वन्दे वांछित कामार्थे चन्द्रार्घकृत शेखराम्। सिंहरूढ़ा चतुर्भुजा महागौरी यशस्वनीम्।। पूर्णन्दु निभां गौरी सोमचक्रस्थितां अष्टमं महागौरी त्रिनेत्राम्। वराभीतिकरां त्रिशूल डमरूधरां महागौरी भजेम्।। पटाम्बर परिधानां मृदुहास्या नानालंकार भूषिताम्। मंजीर, हार, केयूर किंकिणी रत्नकुण्डल मण्डिताम्।। प्रफुल्ल वंदना पल्ल्वाधरां कातं कपोलां त्रैलोक्य मोहनम्। कमनीया लावण्यां मृणांल चंदनगंधलिप्ताम्।।

मां को अर्पित करें ये समान शारदीय नवरात्रि के अष्टमी तिथि पर मां अंबे को लाल रंग की चुनरी में  सिक्के और बताशे रख कर चढ़ाना चाहिए। ऐसा करने से माता रानी आपकी सभी  मुरादें पूरी करती हैं।