The year 2020 Poem By Nalini Gupta Guest Post

I am Nalini Gupta. I live in Singapore with my family. I am a Primary School Teacher here. In my younger days, I have worked as a Radio and TV host. I have done a lot of professional compering in English and Hindi. I did all this in Ahmedabad and New Delhi. Its been 22 + years out of India but we visit India very very often and still hold Indian citizenship. My passions include teaching, writing poems occasionally, walking, growing microgreens, somewhat cooking and taking care of the family. I wish the post COVID world becomes one sustainable/eco-friendly green world which can be proudly handed over to the next generation. My sincere prayers for all those suffering.

The Year 2020 Poem in Hindi

साल दो हज़ार बीस दबे पाँव कुछ यूँ आया
इंसान के ज़मीर को आइना दिखाया
कहा अपने गिरेबान में झाँक ए इंसान
मैंने तुम्हे एक मुकम्मल जहाँ से नवाज़ा
तुमने अपनी जागीर समझ मेरा अस्तित्व ही मिटाना चाहा
जिन जिन तरक्कियों पर तुझे है नाज़
उन सब गलत फ़हमियों का मैं कर दूंगा पर्दा फाश
साल दो हज़ार बीस दबे पाँव कुछ यूँ आया
इंसान के ज़मीर को आइना दिखाया
वक्त रहते थम जा, तरक्की की बदल दे परिभाषा
जुड़ जा अपनी मिटटी से, जुड़ जा इंसानियत से
छोड़ दे धरती पर तबाही मचाना
यह जागीर नहीं कुछ ही उद्योगपतियों की
यह आशियाना है सैकड़ों मज़दूरों का भी
इसी में पलना है पेड़ पशु और पंछियों को भी
साल दो हज़ार बीस दबे पाँव कुछ यूँ आया
इंसान के ज़मीर को आइना दिखाया
आसमान सूरज चाँद सितारों और ग्रहों की कर ले सैर
अभिमानी तेवर के साथ आखिर में जोड़ने हैं इसी मिटटी से पैर
इंसानियत से नाता जोड़, अपनी हवस पर लगा रोक
कल लगी हुई थी आँखों पर पट्टी, आज मुँह पर है बंधी पट्टी
कल ना जाने कफ़न भी होगा नसीब
कौन जाने वारिस भी होगा करीब
साल दो हज़ार बीस दबे पाँव कुछ यूँ आया
इंसान के ज़मीर को आइना दिखाया

Poem Written By Nalini Gupta From Singapore

 

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Categories: Hindi Poems

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